
बूंदों का संगीत
रिमझिम-रिमझिम बरखा आई,
काली चादर - सी लहराई.
गलियों में बच्चों का शोर,
नाच रहे खुश होकर मोर .
रिमझिम-रिमझिम बरखा आई,
काली चादर - सी लहराई.
गलियों में बच्चों का शोर,
नाच रहे खुश होकर मोर .
पंख उड़ाता गाता गीत,
गर्मी ओढ़ रही है शीत.
धरती बाँट रही है प्रीत,
बूंदों का शीतल संगीत.
हरित क्रान्ति है चारों ओर,
हर्षित होकर भागें ढोर.
गर्मी ओढ़ रही है शीत.
धरती बाँट रही है प्रीत,
बूंदों का शीतल संगीत.
हरित क्रान्ति है चारों ओर,
हर्षित होकर भागें ढोर.
7 comments:
aao bachche gayen geet
अच्छी कविता है ...बधाई |
Sangeetmayee rachna ke liye aapko
dheron badhaaeeyan .
bahut sunder hai varsha-geet.
पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिप्पणी देकर प्रोत्साहित करने के लिए!
मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! बधाई!
bahut sunder......
बहुत ही सुन्दर मनमोहक पंक्तियाँ हैं ------
गरमी ओढ़ रही है शीत
धरती बाँटरही है प्रीत
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हरित क्रांति है चारों ओर
हर्षित होकर भागें ढोर |
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