Saturday, May 29, 2010

अशोक आंद्रे


मेरी चिड़िया

मेरी प्यारी सुन्दर चिड़िया
चूँ -चूँ , चूँ -चूँ करती है ।
फुदक -फुदककर हर आँगन में
इधर-उधर वह तकती है ।

देख उसे फिर मुन्ना राजा
दाना आँगन में बिखराता ।
धीरे से फिर आगे बढकर
उसे तुरंत पकड़ने जाता ।

लेकिन चिड़िया अपनी धुन में
चूँ-चूँ, चूँ-चूँ करती है ।
आँगन का वह दाना चुगकर
चुपके से उड़ जाती है ।

3 comments:

Anonymous said...

pyari kavita hai. Chandani bhi acchi lagi.
Ila

Dr. Sudha Om Dhingra said...

अच्छी प्यारी कविताएँ हैं..

नरेन्द्र व्यास said...

kya khoob chitratmak bhasha me saji hai ye rachna ! behad hee achchhi lagi. aabhar ! aapse ek nivedan hai ki aapko aapki yahoo ID pr ek mail preshit kiya hai, aapko samay mile to kripaya dekhiyega, aapke pratyuttar kee bhee pratiksha rahegee. pranaam !